पहली पोस्टिंग में ही घुस … 60 हजार घूस लेते महिला SDM रंगे हाथ पकड़ी गईं, करियर शुरू होने से पहले ही खत्म

करौली/नादौती (News Desk): राजस्थान के प्रशासनिक गलियारों से एक ऐसी खबर आई है जिसने ईमानदारी का दम भरने वाले सिस्टम की पोल खोलकर रख दी है। नादौती की एसडीएम काजल मीणा, जिन्हें कभी सफलता का उदाहरण माना जाता था, आज भ्रष्टाचार के आरोपों में सलाखों के पीछे हैं। एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने एक बड़े ऑपरेशन में एसडीएम सहित उनके रीडर और सहायक को गिरफ्तार किया है।
💸 रिश्वत का ‘कोड’ और कोर्ट रूम में डील
पूरा मामला जमीन बंटवारे की एक ‘फाइनल डिक्री’ जारी करने से जुड़ा है। पीड़ित किसान से इस काम के बदले एसडीएम काजल मीणा, उनके रीडर दिनेश सैनी और सहायक प्रवीण धाकड़ ने 1 लाख रुपये की डिमांड की थी।
गुरुवार को जब परिवादी पैसे लेकर पहुँचा, तो खेल किसी फिल्मी सीन की तरह चला:
स्टेप 1: रीडर दिनेश ने कोर्ट रूम में ही परिवादी से 60 हजार रुपये लिए (50 हजार एसडीएम के लिए और 10 हजार खुद के लिए)।
स्टेप 2: दिनेश ने ये पैसे दूसरे कमरे में बैठे वरिष्ठ सहायक प्रवीण धाकड़ को थमा दिए।
स्टेप 3: दिनेश ने मैडम (एसडीएम) को कॉल किया और कन्फर्म किया कि ‘काम हो गया है’। मैडम की सहमति मिलते ही जैसे ही प्रवीण ने पैसे बैग में डाले, जाल बिछाकर बैठी ACB की टीम ने धावा बोल दिया।
👜 बैग खुला तो उड़ गए होश: 1 दिन का कलेक्शन 4 लाख!
जब ACB ने सहायक प्रवीण धाकड़ का बैग चेक किया, तो अधिकारी भी दंग रह गए। बैग में रिश्वत के 60 हजार रुपये तो थे ही, साथ ही 4 लाख रुपये की अतिरिक्त नकदी भी मिली। पूछताछ और स्थानीय लोगों से मिली जानकारी के मुताबिक, यह कोई पुरानी बचत नहीं बल्कि ‘मैडम’ का महज एक दिन का कलेक्शन बताया जा रहा है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि ये दोनों कर्मचारी दिनभर केवल मैडम के लिए वसूली का काम ही संभालते थे।
🎓 टॉपर से ‘ट्रैप’ तक का सफर
काजल मीणा कोई साधारण अफसर नहीं हैं। वह साल 2024 बैच की अधिकारी हैं और एसटी श्रेणी में पहली रैंक (स्टेट टॉपर) हासिल की थी। बतौर नादौती एसडीएम यह उनकी पहली मुख्य पोस्टिंग थी। जिस अधिकारी से समाज को नई दिशा देने की उम्मीद थी, वह जॉइनिंग के कुछ ही महीनों के भीतर भ्रष्टाचार के दलदल में ऐसी फंसीं कि पूरा करियर दांव पर लग गया।
🔍 अब आगे क्या?
ACB के डीजी गोविंद गुप्ता और डीआईजी डॉ. रामेश्वर सिंह के नेतृत्व में यह कार्रवाई देर रात तक चलती रही। एसडीएम के सरकारी क्वार्टर और आरोपियों के घरों पर सर्च ऑपरेशन जारी है। दफ्तर से केस डायरी और कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त कर लिए गए हैं।
प्रशासनिक सेवा या वसूली का अड्डा?
यह घटना बताती है कि भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं। जब एक स्टेट टॉपर अधिकारी अपनी पहली ही पोस्टिंग में लाखों का ‘डेली कलेक्शन’ करने लगे, तो आम जनता का न्याय पर से भरोसा उठना लाजमी है।
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