दुनिया अभी पश्चिम एशिया के सुलगते हालातों से निपटने की कोशिश ही कर रही थी कि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के एक बयान ने वैश्विक राजनीति और ऊर्जा बाजार में हड़कंप मचा दिया है। रविवार को ‘फाइनेंशियल टाइम्स’ (Financial Times) को दिए एक विशेष इंटरव्यू में ट्रम्प ने सीधे तौर पर ईरान के तेल संसाधनों पर कब्जे की इच्छा जाहिर की है। ट्रम्प का यह बयान न केवल ईरान के प्रति उनकी सख्त नीति को दर्शाता है, बल्कि आने वाले समय में अमेरिका और ईरान के बीच एक बड़े सैन्य या कूटनीतिक टकराव की आहट भी दे रहा है।
“ईरान का तेल लेना मेरी पसंदीदा चीज़”
डोनाल्ड ट्रम्प ने इंटरव्यू के दौरान अपनी भविष्य की रणनीति को लेकर बड़ी बेबाकी से बात की। उन्होंने कहा, “सच कहूं तो मेरी पसंदीदा चीज है ईरान का तेल लेना। इस पर कब्जे के लिए अमेरिका के पास एक नहीं, बल्कि कई विकल्प मौजूद हैं।” ट्रम्प ने उन आलोचकों को भी करारा जवाब दिया जो उनके इस आक्रामक रुख पर सवाल उठाते हैं। उन्होंने कहा, “अमेरिका में कुछ लोग मुझसे पूछते हैं कि आप ऐसा क्यों कर रहे हैं? मेरा सीधा जवाब है कि वे बेवकूफ हैं। वे वैश्विक शक्ति और संसाधनों के महत्व को नहीं समझते।”
निशाने पर ईरान का ‘खार्ग द्वीप’ (Kharg Island)
ट्रम्प की इस रणनीति के केंद्र में ईरान का रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण ‘खार्ग द्वीप’ है। इंटरव्यू में ट्रम्प ने इसका जिक्र करते हुए कहा, “हो सकता है हम खार्ग द्वीप ले लें, और हो सकता है न लें। लेकिन इतना तय है कि वहां ईरान की सुरक्षा व्यवस्था उतनी मजबूत नहीं है जितनी वे दावा करते हैं। अमेरिका के लिए इसे अपने नियंत्रण में लेना कोई मुश्किल काम नहीं है।”
खार्ग द्वीप क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
ईरान की अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड्डी कहा जाने वाला खार्ग द्वीप फारस की खाड़ी के उत्तरी हिस्से में स्थित है।
90% तेल निर्यात: ईरान का लगभग 90 प्रतिशत तेल निर्यात इसी द्वीप के माध्यम से होता है। रणनीतिक केंद्र: यदि अमेरिका इस द्वीप पर कब्जा करता है या इसे ब्लॉक करता है, तो ईरान की आर्थिक ताकत पूरी तरह से खत्म हो सकती है। वैश्विक प्रभाव: इस द्वीप पर किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई का मतलब होगा वैश्विक तेल कीमतों में भारी उछाल, जो पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।
समझौता या विनाश: ट्रम्प की सीधी चेतावनी
ट्रम्प ने जहाँ एक तरफ सैन्य कार्रवाई और कब्जे की बात की, वहीं दूसरी तरफ कूटनीतिक रास्ते का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ईरान के साथ जारी दशकों पुराने संघर्ष को खत्म करने के लिए एक ‘बड़ा समझौता’ संभव है। लेकिन इसके साथ ही उन्होंने तेहरान को कड़ी चेतावनी भी दी। ट्रम्प ने कहा, “ईरान के पास समझौता करने का एक मौका है। लेकिन अगर उन्होंने अमेरिका का प्रस्ताव नहीं माना और अपनी जिद पर अड़े रहे, तो उनके पास उनका देश ही नहीं बचेगा।”
विशेषज्ञों की राय और वैश्विक चिंताएं
डोनाल्ड ट्रम्प के इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय संबंधों के जानकारों ने चिंता जताई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ट्रम्प दोबारा सत्ता में आते हैं और अपनी इस ‘तेल कब्जे’ वाली नीति पर आगे बढ़ते हैं, तो यह सीधे तौर पर एक पूर्ण युद्ध (Full-scale War) को निमंत्रण देना होगा।
ईरान पहले ही कह चुका है कि वह अपनी क्षेत्रीय संप्रभुता और संसाधनों की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाएगा। रूस और चीन जैसी महाशक्तियों की नजर भी अमेरिका के इस संभावित रुख पर टिकी है।
क्या नया युद्ध शुरू होने वाला है?
ट्रम्प का यह इंटरव्यू इस बात का संकेत है कि आने वाले समय में अमेरिका की ‘ईरान पॉलिसी’ और भी ज्यादा आक्रामक होने वाली है। तेल और ऊर्जा संसाधनों को युद्ध के हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की यह सोच मध्य-पूर्व के समीकरणों को पूरी तरह बदल सकती है। अब देखना यह होगा कि ईरान और अंतरराष्ट्रीय समुदाय ट्रम्प की इस खुली धमकी पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं।