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नई दिल्ली | विशेष संवाददाता
भूमिका: खाड़ी में बारूद की गंध और भारत में बेचैनी
पश्चिम एशिया (Middle East) के रेगिस्तान एक बार फिर बारूद की गंध से भर गए हैं। ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ता त्रिकोणीय तनाव अब केवल कूटनीतिक बयानों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका असर दुनिया की अर्थव्यवस्था और आम आदमी की रसोई तक पहुँचने लगा है। विशेष रूप से ‘होर्मुज की खाड़ी’ (Strait of Hormuz) में बिगड़े हालातों ने वैश्विक तेल आपूर्ति श्रृंखला को हिला कर रख दिया है। भारत, जो अपनी तेल जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है, इस वैश्विक उथल-पुथल से अछूता नहीं है। लेकिन युद्ध की खबरों से ज्यादा खतरनाक साबित हो रही हैं सोशल मीडिया पर फैल रही ‘लॉकडाउन’ की अफवाहें, जिन्होंने देश के कई हिस्सों में अफरा-तफरी का माहौल पैदा कर दिया है।
1. होर्मुज की खाड़ी: वैश्विक तेल सप्लाई की ‘दुखती रग’
होर्मुज की खाड़ी दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण ‘ऑयल चोकपॉइंट’ है। वैश्विक कच्चे तेल का लगभग 20% से 30% हिस्सा इसी संकरे रास्ते से होकर गुजरता है। ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच सैन्य तनाव के कारण इस मार्ग पर जहाजों की आवाजाही बाधित होने की आशंका बढ़ गई है।
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सप्लाई चैन पर असर: यदि यह मार्ग बंद होता है, तो कच्चे तेल की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी तय है। भारत के लिए यह स्थिति चिंताजनक है क्योंकि हम अपनी जरूरत का 80% से अधिक तेल विदेशों से मंगवाते हैं।
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पेट्रोल पंपों पर उमड़ी भीड़: अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनिश्चितता की खबरों के बीच भारत के कई राज्यों (जैसे दिल्ली, यूपी और महाराष्ट्र) में पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें देखी गईं। लोगों को डर है कि आने वाले दिनों में तेल की किल्लत हो सकती है।
2. सोशल मीडिया और ‘लॉकडाउन’ की अफवाह: डर का नया वायरस
जब भी कोई वैश्विक संकट आता है, सोशल मीडिया पर फर्जी खबरों (Fake News) की बाढ़ आ जाती है। इस बार भी यही हुआ। व्हाट्सएप और फेसबुक पर एक संदेश तेजी से वायरल होने लगा कि सरकार तेल की कमी और सुरक्षा कारणों से जल्द ही देशव्यापी लॉकडाउन जैसा सख्त कदम उठाने जा रही है।
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असमंजस का माहौल: इन खबरों ने आम जनता, विशेषकर मध्यम वर्ग और दिहाड़ी मजदूरों के बीच डर पैदा कर दिया। लोग राशन और जरूरी सामान जमा करने के लिए बाजारों की ओर दौड़ पड़े, जिससे बाजारों में अनावश्यक दबाव बढ़ा और वस्तुओं की कृत्रिम कमी (Artificial Scarcity) पैदा होने लगी।
3. सरकार का कड़ा रुख: हरदीप सिंह पुरी और किरेन रिजिजू का स्पष्टीकरण
हालात को बेकाबू होते देख केंद्र सरकार के दो वरिष्ठ मंत्रियों ने कमान संभाली और इन अफवाहों का सिरे से खंडन किया।
पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी का आश्वासन
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने सोशल मीडिया के माध्यम से जनता को संबोधित किया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा:
“देश में लॉकडाउन लागू करने जैसी कोई योजना नहीं है। ये सभी दावे पूरी तरह निराधार और भ्रामक हैं। भारत के पास तेल का पर्याप्त भंडार है और आपूर्ति श्रृंखला को सुचारु बनाए रखने के लिए सरकार हर संभव कदम उठा रही है। नागरिक अफवाहों पर ध्यान न दें और पैनिक बाइंग (घबराहट में खरीदारी) से बचें।”
किरेन रिजिजू का संसद परिसर से संदेश
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने भी मीडिया से बातचीत में इन खबरों को ‘तथ्यहीन’ करार दिया। उन्होंने एक महत्वपूर्ण घोषणा भी की:
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एक्साइज ड्यूटी में कटौती: सरकार ने बढ़ती कीमतों के बोझ से जनता को बचाने के लिए पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी कम करने का फैसला लिया है। यह कदम सीधे तौर पर आम आदमी को राहत देने के लिए उठाया गया है। रिजिजू ने संकेत दिया कि इस राहत भरे फैसले के लिए संसद में प्रधानमंत्री के प्रति आभार भी व्यक्त किया जाएगा।
4. पैनिक बाइंग: एक कृत्रिम संकट का खतरा
विशेषज्ञों और अधिकारियों का मानना है कि वास्तविक संकट से ज्यादा बड़ा खतरा ‘घबराहट’ है। जब हजारों लोग एक साथ पेट्रोल पंपों पर जाते हैं और अपनी गाड़ी की टंकी फुल कराने के साथ-साथ कैन और बोतलों में तेल भरने लगते हैं, तो इससे उस समय के लिए तेल खत्म हो जाता है।
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अपील: सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे संयम बरतें। जरूरत से ज्यादा भंडारण करने से उन लोगों को परेशानी होती है जिन्हें आपातकालीन स्थिति (जैसे एम्बुलेंस या फायर ब्रिगेड) के लिए तेल की तत्काल आवश्यकता होती है।
5. भारत की ऊर्जा सुरक्षा: सरकार की तैयारी
भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि हमारे पास ‘स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व’ (Strategic Petroleum Reserves) मौजूद हैं, जो किसी भी आपातकालीन स्थिति में हफ्तों तक देश की जरूरतों को पूरा कर सकते हैं। इसके अलावा, भारत अन्य देशों से भी वैकल्पिक रास्तों के जरिए तेल आयात करने की संभावनाओं पर विचार कर रहा है।
समझदारी और संयम ही सबसे बड़ा हथियार
वैश्विक तनाव एक वास्तविकता है और इसका असर कीमतों पर पड़ना स्वाभाविक है। लेकिन ‘लॉकडाउन’ की बात पूरी तरह झूठ है। ऐसे समय में एक जिम्मेदार नागरिक के तौर पर हमारा कर्तव्य है कि हम:
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सोशल मीडिया पर आने वाले असत्यापित संदेशों को आगे न बढ़ाएं।
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केवल आधिकारिक सरकारी सूत्रों (PIB, मंत्रालय के हैंडल) पर ही भरोसा करें।
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घबराहट में सामान जमा न करें।


