दर्जी की बेटी नसरीन ने रचा इतिहास, इंटरमीडिएट आर्ट्स में बिहार में पाया तीसरा स्थान

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बगहा/पश्चिम चम्पारण | विशेष संवाददाता

भूमिका: अभावों के बीच चमकी सफलता की किरण

कहते हैं कि अगर इरादे फौलादी हों और लक्ष्य स्पष्ट, तो संसाधनों की कमी कभी बेड़ियाँ नहीं बन सकतीं। पश्चिम चम्पारण के बगहा की नासरीन परवीन ने इस कहावत को हकीकत में बदल कर दिखा दिया है। बिहार विद्यालय परीक्षा समिति द्वारा घोषित इंटरमीडिएट आर्ट्स के परिणामों में नासरीन ने पूरे प्रदेश में तीसरा स्थान हासिल कर न केवल अपने परिवार, बल्कि पूरे जिले का नाम रौशन किया है। गुरुवार को बगहा में जश्न का माहौल रहा, जहाँ स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों ने इस ‘बेटिया’ की मेधा को सलाम किया।


1. संघर्ष से शिखर तक का सफर

नासरीन परवीन बगहा-2 प्रखंड के एक छोटे से गांव नरवल बोरवल की रहने वाली हैं। उनके पिता, अब्दुल्लाह अंसारी, पेशे से एक साधारण टेलर (दरजी) हैं। एक ऐसे परिवार में जहाँ हर दिन की आजीविका के लिए कड़ा संघर्ष करना पड़ता हो, वहां शिक्षा को प्राथमिकता देना और राज्य स्तर पर टॉप करना किसी चमत्कार से कम नहीं है।

  • अंकों का गणित: नासरीन ने इस परीक्षा में कुल 477 अंक (95.4%) प्राप्त किए हैं।

  • सीमित साधन, असीमित संकल्प: घर में पढ़ाई के लिए न तो अलग कमरा था और न ही महंगे कोचिंग संस्थानों की फीस भरने के पैसे। नासरीन ने अपनी सफलता का श्रेय अपनी कड़ी मेहनत, शिक्षकों के मार्गदर्शन और माता-पिता के अटूट विश्वास को दिया है।


2. प्रशासनिक सम्मान: जब अधिकारी पहुँचे द्वार

नासरीन की इस ऐतिहासिक सफलता की गूँज जब प्रशासनिक गलियारों में पहुँची, तो अधिकारी खुद को उन्हें सम्मानित करने से रोक नहीं पाए।

एसडीएम चांदनी कुमारी का प्रोत्साहन

बगहा की एसडीएम चांदनी कुमारी ने नासरीन से मुलाकात कर उन्हें सम्मानित किया। एसडीएम ने कहा कि नासरीन जैसी बेटियां समाज के लिए रोल मॉडल हैं।

“ग्रामीण परिवेश से निकलकर, जहाँ सुविधाओं का अभाव है, राज्य के शीर्ष तीन में स्थान बनाना यह साबित करता है कि प्रतिभा किसी पहचान की मोहताज नहीं होती। प्रशासन नासरीन की आगे की पढ़ाई में हर संभव मदद सुनिश्चित करेगा।” – चांदनी कुमारी, एसडीएम, बगहा

सांसद सुनील कुमार ने दी बधाई

वाल्मीकिनगर के सांसद सुनील कुमार ने भी नासरीन के घर पहुँचकर उन्हें अंगवस्त्र भेंट किया और उज्ज्वल भविष्य का आशीर्वाद दिया। सांसद ने इस बात पर जोर दिया कि नासरीन की सफलता केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र की उन हजारों लड़कियों के लिए एक प्रेरणा है जो पढ़-लिखकर कुछ बनना चाहती हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि मेधावी छात्रों को सरकार की योजनाओं का पूरा लाभ दिलाया जाएगा।


3. भविष्य का लक्ष्य: न्याय की आवाज बनना

अक्सर देखा जाता है कि टॉप करने वाले छात्र डॉक्टर या इंजीनियर बनने का सपना देखते हैं, लेकिन नासरीन का लक्ष्य थोड़ा अलग और समाज के प्रति संवेदनशील है।

  • वकील बनने का सपना: नासरीन भविष्य में एक कुशल वकील बनना चाहती हैं। उनका कहना है कि समाज के गरीब और दबे-कुचले तबके को न्याय दिलाना उनका मुख्य उद्देश्य है।

  • न्यायिक सेवा की ओर कदम: कानून की पढ़ाई पूरी करने के बाद वह न्यायिक सेवा (Judicial Services) में जाना चाहती हैं, ताकि तंत्र के भीतर रहकर सकारात्मक बदलाव ला सकें।


4. परिवार और गांव में जश्न का माहौल

नासरीन की सफलता की खबर फैलते ही नरवल बोरवल गांव में मिठाई बाँटने का सिलसिला शुरू हो गया। पिता अब्दुल्लाह अंसारी की आँखों में गर्व के आँसू थे। उन्होंने बताया कि उन्होंने अपनी बेटी को कभी भी घर के कामों के लिए मजबूर नहीं किया और हमेशा उसे पढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया।

ग्रामीणों का कहना है:

“हमारे गांव की बेटी ने साबित कर दिया कि बगहा की मिट्टी में हुनर की कमी नहीं है। नासरीन ने दिखा दिया कि अगर हौसला हो तो आसमान भी झुकाया जा सकता है।”


5. सफलता का मंत्र: नासरीन की जुबानी

नासरीन ने अपनी तैयारी की रणनीति के बारे में बात करते हुए बताया कि वह नियमित रूप से 8 से 10 घंटे पढ़ाई करती थीं। उन्होंने सोशल मीडिया और मोबाइल फोन से दूरी बनाए रखी और अपना पूरा ध्यान किताबों पर केंद्रित किया। उनका मानना है कि निरंतरता (Consistency) ही सफलता की सबसे बड़ी कुंजी है।


एक नई उम्मीद का उदय

नासरीन परवीन की यह कहानी केवल एक परीक्षा पास करने की नहीं है, बल्कि यह उन सभी बाधाओं को पार करने की है जो एक लड़की के सामने शिक्षा के रास्ते में आती हैं। एक टेलर की बेटी का बिहार का तीसरा टॉपर बनना राज्य की शिक्षा व्यवस्था और महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक सकारात्मक संकेत है।

बगहा आज गर्व से कह सकता है कि उसकी एक बेटी न्याय की तराजू संभालने के लिए तैयार हो रही है। नासरीन की यह उड़ान अभी शुरू हुई है, और पूरा बिहार उनकी अगली सफलता का इंतजार कर रहा है।

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