Post Views : 👁️ 325.76K
बगहा/पश्चिम चम्पारण | विशेष संवाददाता
भूमिका: अभावों के बीच चमकी सफलता की किरण
कहते हैं कि अगर इरादे फौलादी हों और लक्ष्य स्पष्ट, तो संसाधनों की कमी कभी बेड़ियाँ नहीं बन सकतीं। पश्चिम चम्पारण के बगहा की नासरीन परवीन ने इस कहावत को हकीकत में बदल कर दिखा दिया है। बिहार विद्यालय परीक्षा समिति द्वारा घोषित इंटरमीडिएट आर्ट्स के परिणामों में नासरीन ने पूरे प्रदेश में तीसरा स्थान हासिल कर न केवल अपने परिवार, बल्कि पूरे जिले का नाम रौशन किया है। गुरुवार को बगहा में जश्न का माहौल रहा, जहाँ स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों ने इस ‘बेटिया’ की मेधा को सलाम किया।
1. संघर्ष से शिखर तक का सफर
नासरीन परवीन बगहा-2 प्रखंड के एक छोटे से गांव नरवल बोरवल की रहने वाली हैं। उनके पिता, अब्दुल्लाह अंसारी, पेशे से एक साधारण टेलर (दरजी) हैं। एक ऐसे परिवार में जहाँ हर दिन की आजीविका के लिए कड़ा संघर्ष करना पड़ता हो, वहां शिक्षा को प्राथमिकता देना और राज्य स्तर पर टॉप करना किसी चमत्कार से कम नहीं है।
-
अंकों का गणित: नासरीन ने इस परीक्षा में कुल 477 अंक (95.4%) प्राप्त किए हैं।
-
सीमित साधन, असीमित संकल्प: घर में पढ़ाई के लिए न तो अलग कमरा था और न ही महंगे कोचिंग संस्थानों की फीस भरने के पैसे। नासरीन ने अपनी सफलता का श्रेय अपनी कड़ी मेहनत, शिक्षकों के मार्गदर्शन और माता-पिता के अटूट विश्वास को दिया है।
2. प्रशासनिक सम्मान: जब अधिकारी पहुँचे द्वार
नासरीन की इस ऐतिहासिक सफलता की गूँज जब प्रशासनिक गलियारों में पहुँची, तो अधिकारी खुद को उन्हें सम्मानित करने से रोक नहीं पाए।
एसडीएम चांदनी कुमारी का प्रोत्साहन
बगहा की एसडीएम चांदनी कुमारी ने नासरीन से मुलाकात कर उन्हें सम्मानित किया। एसडीएम ने कहा कि नासरीन जैसी बेटियां समाज के लिए रोल मॉडल हैं।
“ग्रामीण परिवेश से निकलकर, जहाँ सुविधाओं का अभाव है, राज्य के शीर्ष तीन में स्थान बनाना यह साबित करता है कि प्रतिभा किसी पहचान की मोहताज नहीं होती। प्रशासन नासरीन की आगे की पढ़ाई में हर संभव मदद सुनिश्चित करेगा।” – चांदनी कुमारी, एसडीएम, बगहा
सांसद सुनील कुमार ने दी बधाई
वाल्मीकिनगर के सांसद सुनील कुमार ने भी नासरीन के घर पहुँचकर उन्हें अंगवस्त्र भेंट किया और उज्ज्वल भविष्य का आशीर्वाद दिया। सांसद ने इस बात पर जोर दिया कि नासरीन की सफलता केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र की उन हजारों लड़कियों के लिए एक प्रेरणा है जो पढ़-लिखकर कुछ बनना चाहती हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि मेधावी छात्रों को सरकार की योजनाओं का पूरा लाभ दिलाया जाएगा।
3. भविष्य का लक्ष्य: न्याय की आवाज बनना
अक्सर देखा जाता है कि टॉप करने वाले छात्र डॉक्टर या इंजीनियर बनने का सपना देखते हैं, लेकिन नासरीन का लक्ष्य थोड़ा अलग और समाज के प्रति संवेदनशील है।
-
वकील बनने का सपना: नासरीन भविष्य में एक कुशल वकील बनना चाहती हैं। उनका कहना है कि समाज के गरीब और दबे-कुचले तबके को न्याय दिलाना उनका मुख्य उद्देश्य है।
-
न्यायिक सेवा की ओर कदम: कानून की पढ़ाई पूरी करने के बाद वह न्यायिक सेवा (Judicial Services) में जाना चाहती हैं, ताकि तंत्र के भीतर रहकर सकारात्मक बदलाव ला सकें।


