गाजा और लेबनान में इजरायल का ऑपरेशन क्लीन स्वीप – हमास और हिजबुल्लाह पर भीषण प्रहार

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गाजा पट्टी पिछले कई महीनों से बारूद के ढेर पर बैठी है, लेकिन शनिवार की रात जो हुआ, उसने यह स्पष्ट कर दिया है कि इजरायल डिफेंस फोर्स (IDF) अब किसी भी समझौते या रियायत के मूड में नहीं है। एक तरफ गाजा के मध्य में हमास के लड़ाकों का सफाया किया गया, तो दूसरी तरफ लेबनान की बेका घाटी और बेरूत में हिजबुल्लाह के कमर तोड़ने की कोशिश की गई। यह दोतरफा हमला इजरायल की उस नीति का हिस्सा है, जिसके तहत वह अपनी सीमाओं पर मौजूद हर खतरे को जड़ से खत्म करना चाहता है।

गाजा पट्टी: मध्य क्षेत्र में हमास के डेथ स्क्वाड का खात्मा

आईडीएफ की दक्षिणी कमान को खुफिया जानकारी मिली थी कि गाजा पट्टी के मध्य भाग में हमास के लड़ाकों का एक दस्ता किसी बड़ी साजिश को अंजाम देने के लिए इकट्ठा हुआ है।

  • सटीक स्ट्राइक: आईडीएफ के ड्रोन और निगरानी तंत्र ने लगभग दस हथियारबंद लड़ाकों की पहचान की। जैसे ही इन लड़ाकों की लोकेशन कन्फर्म हुई, इजरायली वायुसेना और जमीनी बलों ने एक संयुक्त ऑपरेशन शुरू किया।

  • परिणाम: चंद मिनटों की कार्रवाई में हमास के सभी दस लड़ाकों को मार गिराया गया। आईडीएफ का दावा है कि ये लड़ाके इजरायली सैनिकों पर घात लगाकर हमला करने की योजना बना रहे थे।

अहमद फायज सलेम अबू रिदा: भरोसे का कत्ल और अंजाम

इस पूरे ऑपरेशन में सबसे महत्वपूर्ण नाम अहमद फायज सलेम अबू रिदा का है। इसकी कहानी यह बताती है कि युद्ध के मैदान में रिहाई और समझौते कितने जोखिम भरे हो सकते हैं।

1. विंग्स ऑफ फ्रीडम का उल्लंघन: अहमद को पहले संदिग्ध गतिविधियों के लिए गिरफ्तार किया गया था, लेकिन मानवीय आधार पर विंग्स ऑफ फ्रीडम ऑपरेशन के तहत उसे रिहा किया गया था। रिहाई की शर्त थी कि वह किसी भी उग्रवादी गतिविधि में शामिल नहीं होगा।
2. येलो लाइन और संदिग्ध फंडिंग: रिहाई के बाद अहमद ने लगातार येलो लाइन (प्रतिबंधित क्षेत्र) को पार किया। खुफिया एजेंसियों ने पाया कि वह संदिग्ध संगठनों को पैसे भेज रहा था और आईडीएफ की मूवमेंट की जानकारी साझा कर रहा था।
3. 188वीं ब्रिगेड की कार्रवाई: आईडीएफ की 188वीं ब्रिगेड ने अहमद की गतिविधियों पर नजर रखी और शनिवार रात एक सटीक हमले में उसे खत्म कर दिया। यह उन सभी के लिए एक कड़ा संदेश है जो रिहाई के बाद दोबारा हथियार उठाते हैं।

लेबनान मोर्चा: हिजबुल्लाह के ठिकानों पर मिसाइल प्रहार

गाजा में कार्रवाई के साथ-साथ इजरायल ने उत्तर में लेबनान की सीमा पर भी अपनी ताकत दिखाई। इजरायल का मानना है कि हमास और हिजबुल्लाह एक ही सिक्के के दो पहलू हैं, जो ईरान के इशारे पर काम कर रहे हैं।

  • बेका घाटी में तबाही: आईडीएफ ने बेका घाटी में एक ऐसे लॉन्चर को नष्ट किया जो इजरायल की सीमा पर मिसाइल दागने के लिए पूरी तरह तैयार था। अगर यह हमला सफल हो जाता, तो इजरायल के नागरिक क्षेत्रों में भारी नुकसान हो सकता था।

  • बेरूत में एयरस्ट्राइक: रात भर बेरूत के उपनगरों और अन्य सैन्य इमारतों पर हमले जारी रहे। इजरायली खुफिया विभाग के अनुसार, ये इमारतें हिजबुल्लाह के हथियार डिपो के रूप में इस्तेमाल की जा रही थीं। इन हमलों का उद्देश्य हिजबुल्लाह की सप्लाई चेन को काटना है।

सोशल मीडिया और मनोवैज्ञानिक युद्ध

आईडीएफ अब केवल जमीन पर ही नहीं, बल्कि डिजिटल प्लेटफॉर्म X पर भी युद्ध लड़ रहा है। ऑपरेशन के तुरंत बाद वीडियो और डेटा साझा करना इस बात का सबूत है कि इजरायल दुनिया को यह दिखाना चाहता है कि उसकी कार्रवाइयां सटीक और तर्कसंगत हैं। आईडीएफ ने साफ कहा कि उनकी कार्रवाई का उद्देश्य केवल उग्रवादियों को खत्म करना है, न कि नागरिकों को नुकसान पहुँचाना।

आगे क्या?

हमास के कमांडरों का मारा जाना और हिजबुल्लाह के ठिकानों का ध्वस्त होना निश्चित रूप से इन संगठनों के लिए एक बड़ा झटका है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की कार्रवाइयां भविष्य में और बड़े संघर्ष को जन्म दे सकती हैं।

अहमद अबू रिदा जैसे लड़ाकों का अंत यह साबित करता है कि इजरायल अब जीरो टॉलरेंस की नीति पर चल रहा है। गाजा से लेबनान तक फैली यह आग शांत होगी या विश्व युद्ध की आहट बनेगी, यह आने वाले कुछ दिन तय करेंगे। लेकिन फिलहाल, आईडीएफ ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है।

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